भारत की कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate-TFR) घटकर 1.9 पर पहुंच गई है, जो प्रतिस्थापन स्तर (Replacement Level) 2.1 से कम है। यह देश में जनसंख्या वृद्धि की बदलती प्रवृत्ति को दर्शाती है कि आने वाले समय में भारत जनसंख्या स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतिस्थापन स्तर 2.1 वह दर होती है, जिस पर एक पीढ़ी स्वयं को अगली पीढ़ी में प्रतिस्थापित कर पाती है। जब प्रजनन दर (1.9 ) या इससे कम हो जाती है, तो लंबे समय में जनसंख्या वृद्धि की गति धीमी पड़ने लगती है।

स्वास्थ्य और जनसंख्या विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा का बढ़ता स्तर, महिलाओं की कार्यक्षेत्र में बढ़ती भागीदारी, परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता तथा शहरीकरण मंहगाई जैसे कारकों ने प्रजनन दर में कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

प्रजनन दर में लगातार गिरावट भविष्य में वृद्ध आबादी बढ़ने और कार्यशील आयु वर्ग के अनुपात में कमी जैसी चुनौतियां भी पैदा कर सकती है। और भारत में कार्यशील जनसंख्या काम और वृद्ध की संख्या ज्यादा होगी, इसलिए जनसंख्या संतुलन बनाए रखने के लिए दीर्घकालिक नीतियों की आवश्यकता होगी।

भारत की प्रजनन दर का प्रतिस्थापन स्तर से नीचे आना देश की जनसांख्यिकीय स्थिति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में सामाजिक और आर्थिक नीतियों को प्रभावित कर सकता है।