देश की राजधानी दिल्ली में लापता व्यक्तियों के मामलों को लेकर चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2026 की शुरुआत में दर्ज किए गए लापता लोगों के मामलों में महिलाओं, लड़कियों और नाबालिगों की संख्या सबसे अधिक रही है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2026 के पहले 15 दिनों में 807 लोगों के लापता होने की सूचना दर्ज की गई, जिनमें 509 महिलाएं और लड़कियां शामिल थीं। साथ ही, 191 नाबालिगों के लापता होने के मामले भी सामने आए।

वर्ष 2025 के आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। दिल्ली में पूरे वर्ष के दौरान 24,508 लोगों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज की गई थी, जिनमें लगभग 60 प्रतिशत महिलाएं थीं। इनमें से 15,421 लोगों का पता लगा लिया गया, लेकिन 9,087 मामले अब भी अनसुलझे बने हुए हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, किशोरियों के लापता होने के मामले विशेष चिंता का विषय हैं। वर्ष 2025 में 5,081 किशोर-किशोरियों के लापता होने की सूचना मिली थी, जिनमें 3,970 लड़कियां थीं। इनमें से 1,013 लड़कियों का अब तक पता नहीं चल पाया है।

हालांकि, दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जनवरी 2026 के आंकड़े पिछले वर्षों की तुलना में कोई असामान्य वृद्धि नहीं दर्शाते हैं। पुलिस का कहना है कि राजधानी में हर महीने औसतन लगभग 2,000 लोगों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज होती है।

मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है तथा मामलों की त्वरित जांच और प्रभावी खोज अभियान चलाने की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते शहरीकरण, पारिवारिक विवाद, मानव तस्करी और अन्य सामाजिक कारणों की गहन जांच आवश्यक है।

दिल्ली में लापता व्यक्तियों के बढ़ते मामलों ने कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में सरकार और पुलिस प्रशासन पर इन मामलों के शीघ्र समाधान और रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने का दबाव बढ़ रहा है।