हरियाणा को जल सुरक्षा की बड़ी सौगात: 4000 करोड़ के विश्व बैंक ऋण से बदलेगी तस्वीर, 2 लाख एकड़ जलभराव वाली जमीन होगी उपयोगीचंडीगढ़। हरियाणा में जल प्रबंधन और कृषि सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘जल संरक्षित हरियाणा’ परियोजना के लिए विश्व बैंक ने 4000 करोड़ रुपये के ऋण को मंजूरी दी है। लगभग 5714 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना वर्ष 2026 से 2032 तक चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य राज्य को जल संरक्षण, सिंचाई प्रबंधन और भूजल पुनर्भरण के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाना है।
परियोजना के तहत हरियाणा के 15 क्लस्टरों में फैले करीब 48.94 लाख एकड़ क्षेत्र को शामिल किया गया है। सरकार का दावा है कि इससे कृषि उत्पादन बढ़ाने, जल संकट कम करने और सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी।
परियोजना के प्रमुख कार्य
1. 678 नहरों का पुनर्वास
राज्य में शेष बची 678 नहरों की मरम्मत और आधुनिकीकरण किया जाएगा, जिससे सिंचाई नेटवर्क को मजबूत बनाया जा सकेगा।
2. 620 जल मार्गों का सुधार
620 जल चैनलों के पुनर्विकास से लगभग 3.18 लाख एकड़ कृषि भूमि को बेहतर सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।
3. सूक्ष्म सिंचाई का विस्तार
नहर आधारित माइक्रो इरिगेशन परियोजनाओं का विस्तार किया जाएगा, जिससे पानी की बचत के साथ कृषि उत्पादकता बढ़ेगी।
4. 2 लाख एकड़ जलभराव वाली भूमि का पुनर्जीवन
लंबे समय से जलभराव की समस्या झेल रही लगभग 2 लाख एकड़ भूमि को खेती योग्य बनाने की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कृषि क्षेत्र को बड़ा लाभ मिल सकता है।
5. भूजल संरक्षण और पुनर्भरण
भूजल स्तर में सुधार के लिए विभिन्न संरचनाएं विकसित की जाएंगी तथा जल संरक्षण गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
6. जलाशयों का विकास
दक्षिणी हरियाणा सहित विभिन्न क्षेत्रों में जल निकायों और जल संरचनाओं का विकास किया जाएगा, जिससे वर्षा जल संचयन को बढ़ावा मिलेगा।
7. शुद्ध किए गए अपशिष्ट जल का उपयोग
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित जल को कृषि कार्यों में उपयोग करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे मीठे पानी पर दबाव कम होगा।
8. फसल विविधीकरण को बढ़ावा
धान जैसी अधिक पानी खपत वाली फसलों के स्थान पर वैकल्पिक फसलों को प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) जैसी तकनीकों का विस्तार किया जाएगा।
9. डिजिटल जल प्रबंधन प्रणाली
राज्य में जल उपलब्धता, उपयोग और वितरण की निगरानी के लिए रियल-टाइम डिजिटल वाटर मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया जाएगा।
सात ‘डार्क जोन’ जिलों को मिल सकती है राहत
हरियाणा के कई जिलों में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। सरकार का मानना है कि परियोजना के तहत भूजल पुनर्भरण, माइक्रो इरिगेशन और जल संरक्षण उपायों से ऐसे क्षेत्रों को राहत मिल सकती है जहां जल संकट गंभीर रूप ले चुका है।
कृषि और अर्थव्यवस्था पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार परियोजना के सफल क्रियान्वयन से सिंचाई क्षमता बढ़ेगी, पानी की बर्बादी कम होगी और किसानों की लागत घट सकती है। जलभराव वाली भूमि के उपयोग में आने से कृषि क्षेत्र का विस्तार होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की संभावना है।
विश्व बैंक समर्थित ‘जल संरक्षित हरियाणा’ परियोजना राज्य के जल प्रबंधन ढांचे में बड़ा बदलाव ला सकती है। नहरों के आधुनिकीकरण, जल संरक्षण, माइक्रो इरिगेशन और भूजल पुनर्भरण जैसे उपायों के जरिए हरियाणा जल सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहा है।





