उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में सामने आए कथित बंधुआ मजदूरी के मामले ने श्रमिकों की सुरक्षा और श्रम कानूनों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई में दोने-पत्तल बनाने वाली एक फैक्ट्री से कई मजदूरों को मुक्त कराया गया। शुरुआती जांच के अनुसार मजदूरों को नौकरी का झांसा देकर लाया गया था और बाद में उन्हें फैक्ट्री परिसर में बंधक बनाकर अमानवीय परिस्थितियों में काम कराया जा रहा था।
प्राथमिक जांच और पीड़ितों के बयानों के मुताबिक मजदूरों के मोबाइल फोन और पहचान पत्र अपने कब्जे में ले लिए गए थे। आरोप है कि उन्हें लंबे समय तक बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई और विरोध करने पर मारपीट भी की जाती थी। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि पूरे मामले की जांच जारी है।
पीड़ितों ने सुनाई आपबीती
मुक्त कराए गए कई मजदूरों ने बताया कि उन्हें बेहतर रोजगार और अच्छी मजदूरी का लालच देकर मुजफ्फरनगर लाया गया था। लेकिन फैक्ट्री पहुंचने के बाद उनकी आजादी छीन ली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनसे लंबे समय तक लगातार काम कराया जाता था और घर जाने की बात करने पर उनके साथ मारपीट की जाती थी।
प्रशासन ने शुरू की जांच
पुलिस और श्रम विभाग ने फैक्ट्री में चल रही गतिविधियों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और यदि मानव तस्करी, बंधुआ मजदूरी या श्रम कानूनों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बंधुआ मजदूरी पर क्या कहता है कानून?
भारत में बंधुआ मजदूरी प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के तहत किसी भी व्यक्ति से दबाव, कर्ज या धोखे के आधार पर जबरन श्रम कराना अपराध है। इसके अलावा संविधान का अनुच्छेद 23 मानव तस्करी, बेगार और जबरन श्रम पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाता है।
प्रवासी मजदूर सबसे अधिक जोखिम में
विशेषज्ञों का मानना है कि रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने वाले प्रवासी मजदूर अक्सर फर्जी एजेंटों और ठेकेदारों के जाल में फंस जाते हैं। पहचान, कानूनी जानकारी और स्थानीय सहायता के अभाव में वे ऐसे मामलों के सबसे आसान शिकार बनते हैं।
प्रशासन के सामने कई सवाल
इस घटना के सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहे हैं कि यदि मजदूर लंबे समय से फैक्ट्री में बंधक थे तो स्थानीय निगरानी तंत्र, श्रम विभाग और संबंधित एजेंसियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिल सकी। प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और यदि किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
मुजफ्फरनगर का यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि श्रमिक सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर परीक्षा भी है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी, लेकिन फिलहाल इस घटना ने बंधुआ मजदूरी और प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।





