मध्य प्रदेश के पवित्र तीर्थस्थल ओंकारेश्वर में ‘शंकरावतारणम्: एकात्म पर्व 2026’ का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें आदि शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन और एकात्मता के संदेश को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। यह कार्यक्रम धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का एक संगम रहा, जिसमें देशभर से संत, आचार्य और श्रद्धालु शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और मंगलाचरण के साथ हुई, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद आयोजकों ने शंकराचार्य के जन्मोत्सव (वैशाख शुक्ल पंचमी) के महत्व और इस पर्व के उद्देश्य को विस्तार से बताया।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने अद्वैत दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समस्त सृष्टि एक ही चेतना का रूप है और मानव का कर्तव्य है कि वह समाज और प्रकृति के प्रति अपने दायित्व को समझे। इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया, जिसमें पंचतत्वों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—की रक्षा को आध्यात्मिक जिम्मेदारी बताया गया।
इस आयोजन में कई धार्मिक अनुष्ठान भी किए गए, जिनमें दीप प्रज्वलन, पुष्पांजलि और वैदिक स्वस्ति वाचन शामिल रहे। वरिष्ठ संतों और विद्वानों का सम्मान भी किया गया, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ गई।
कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में स्वामी अवधेशानंद गिरि का आगमन और उनका सम्मान शामिल रहा। साथ ही, शंकराचार्य के जीवन और उनके ओंकारेश्वर से जुड़े आध्यात्मिक योगदान को भी याद किया गया।
यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें समाज को एकता, कर्तव्य और प्रकृति के प्रति जागरूक रहने का संदेश भी दिया गया।



