क्या हमारे गाँव आज भी विकास से बेघर है?
यह सवाल केवल किसी टूटे-फूटे मकान को देखकर ही नहीं उठता, बल्कि तब भी उठता है जब हम भारत के गाँवों की ओर देखते हैं। कभी जिन घरों में जीवन की चहल-पहल थी, जहाँ आँगन में बच्चों की हँसी गूँजती थी और चौपालों पर शाम को लोगों की बैठकी लगती थी, आज वहीं कई घर खामोश खड़े दिखाई देते हैं।लेकिन सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? क्या हमारे गाँव सच में इतने कमजोर हो गए हैं कि वहाँ रहने वाले लोग अपने ही घरों को छोड़ने पर मजबूर हो जाएँ? या फिर विकास की दौड़ में कहीं न कहीं गाँव पीछे छूट गए हैं? हम अक्सर सुनते हैं कि भारत “गाँवों का देश” है। अगर सच में ऐसा है, तो फिर भारत के गाँव आज भी विकास के इंतज़ार में क्यों खड़े हैं? क्यों आज भी गाँव का युवा बेहतर शिक्षा, रोजगार और सुविधाओं के लिए शहर की ओर भाग रहा है? क्यों गाँव का किसान अपने खेतों से ज्यादा शहर की मजदूरी को सुरक्षित समझने लगा है?
सरकारें हर साल गाँवों के विकास के बड़े-बड़े दावे करती हैं। योजनाओं के नाम बदलते हैं, घोषणाएँ होती हैं, पोस्टर लगते हैं, भाषण दिए जाते हैं—लेकिन क्या वास्तव में गाँवों की तस्वीर उतनी बदली है जितनी बताई जाती है? अगर विकास सच में हुआ होता, तो क्या आज भी इतने घरों के दरवाज़े बंद मिलते? क्या आज भी कई आँगन वीरान होते? आज स्थिति यह है कि गाँवों में खड़े कई घर अपने लोगों का इंतज़ार करते दिखाई देते हैं। दीवारें जैसे पूछती हों—“क्या हमारा कसूर सिर्फ इतना था कि हम गाँव में बने थे?”
क्या विकास का मतलब केवल शहरों की ऊँची इमारतें और चमकती सड़कें ही है? क्या गाँवों की टूटी सड़कें, अधूरे स्कूल और सीमित रोजगार किसी को दिखाई नहीं देते?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब गाँव खाली हो रहे हैं, तो क्या यह केवल लोगों का पलायन है, या फिर यह हमारे विकास मॉडल की एक खामोश विफलता है? क्योंकि जब लोग अपने गाँव छोड़ते हैं, तो केवल इंसान ही बेघर नहीं होते—घर भी बेघर हो जाते हैं।
शायद हमें खुद से यह सवाल पूछने की ज़रूरत है कि क्या हम सच में अपने गाँवों को विकसित करना चाहते हैं, या फिर केवल भाषणों में ही गाँवों को भारत की आत्मा बताते रहेंगे?
क्योंकि जिस दिन गाँवों में शिक्षा, रोजगार और सम्मानजनक जीवन की सुविधाएँ मिलेंगी, उस दिन कोई भी अपने घर को छोड़कर शहर की भीड़ में खोना नहीं चाहेगा। शायद तब हमारे गाँवों के घर फिर से बेघर नहीं रहेंगे, बल्कि उनमें जीवन, रिश्ते और उम्मीदें फिर से बसने लगेंगी


