भारत के तीन 16 वर्षीय छात्रों—विवान छाछरिया, एरियाना अग्रवाल और अव्याना मेहता—ने Earth Prize 2026 का वैश्विक खिताब जीतकर देश का नाम रोशन किया है। तीनों छात्रों को यह सम्मान उनके अभिनव प्रोजेक्ट 'Plas-Stick' के लिए मिला, जो पानी से माइक्रोप्लास्टिक हटाने का एक सस्ता, पर्यावरण-अनुकूल और प्रभावी समाधान प्रस्तुत करता है। इस उपलब्धि के साथ भारत पहली बार इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता का ग्लोबल विजेता बना है।

प्रतियोगिता के तहत सितंबर 2025 से फरवरी 2026 तक रजिस्ट्रेशन और आइडिया जमा किए गए। अप्रैल 2026 में भारतीय टीम को एशिया क्षेत्र का विजेता चुना गया। इसके बाद मई के अंतिम सप्ताह में सात क्षेत्रीय फाइनलिस्टों के बीच वैश्विक स्तर पर सार्वजनिक मतदान हुआ, जिसमें लगभग 23 हजार लोगों ने हिस्सा लिया। मतदान के बाद 29 मई 2026 को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित ऑनलाइन समारोह में भारतीय टीम को आधिकारिक रूप से ग्लोबल विजेता घोषित किया गया।

'Plas-Stick' कैसे काम करता है?

छात्रों ने इमली के बेकार बीजों से एक बायोडिग्रेडेबल चुंबकीय पाउडर तैयार किया है। इस पाउडर को दूषित पानी में मिलाने पर यह माइक्रोप्लास्टिक के कणों को अपने साथ जोड़ लेता है। इसके बाद चुंबक की सहायता से इन कणों को आसानी से पानी से अलग किया जा सकता है। इस पूरी प्रक्रिया में बिजली की आवश्यकता नहीं होती, जिससे यह तकनीक ग्रामीण और संसाधन-विहीन क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी मानी जा रही है।

इस तकनीक की एक और खासियत यह है कि पानी से निकाले गए माइक्रोप्लास्टिक को फेंका नहीं जाता, बल्कि उसे टाइल्स, कोस्टर और अन्य उपयोगी उत्पादों में बदलकर दोबारा इस्तेमाल किया जाता है। इससे कचरा कम करने और पर्यावरण संरक्षण दोनों में मदद मिलती है।

Earth Prize क्या है?

Earth Prize दुनिया भर के 13 से 19 वर्ष के छात्रों के लिए आयोजित एक प्रमुख पर्यावरणीय नवाचार प्रतियोगिता है। इसका उद्देश्य युवाओं को जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों के लिए व्यावहारिक एवं टिकाऊ समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना है। भारतीय छात्रों की यह उपलब्धि देश के युवा नवाचार और वैज्ञानिक सोच की एक महत्वपूर्ण मिसाल मानी जा रही है।