
हिंद महासागर में डूबता हुआ ईरानी युद्धपोत, जिसे अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी पनडुब्बी के टॉरपीडो हमले के बाद नुकसान पहुँचा।
कैसे हुआ हमला
रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी पनडुब्बी ने जहाज पर टॉरपीडो दागा, जिसके बाद युद्धपोत समुद्र में डूब गया। अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि यह हमला ईरान के साथ चल रहे व्यापक सैन्य संघर्ष का हिस्सा था।
राहत और बचाव अभियान
घटना के बाद श्रीलंका की नौसेना और तटरक्षक बल ने तुरंत खोज और बचाव अभियान शुरू किया। समुद्र में तेल का बड़ा धब्बा और मलबा मिलने की जानकारी दी गई, जबकि कुछ नाविकों को बचा लिया गया।
वैश्विक असर
विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना से पहले से जारी क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है। हिंद महासागर जैसे रणनीतिक समुद्री मार्ग में इस प्रकार की सैन्य कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है।
ऐतिहासिक महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बहुत कम मौकों पर किसी पनडुब्बी ने युद्ध में किसी बड़े सतही जहाज को डुबोया है।





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