पेट्रोल ₹100 के पार, 10 दिनों में चौथी बार बढ़े दाम

आम आदमी पर महंगाई की नई मार, विपक्ष का सरकार पर हमला

देशभर में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सोमवार को तेल कंपनियों ने एक बार फिर ईंधन के दाम बढ़ा दिए। पिछले 10 दिनों में यह चौथी बार है जब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा किया गया है। नई बढ़ोतरी के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर तक पहुंच गया है।

इस बार पेट्रोल की कीमत में ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल में ₹2.71 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण बीते दो हफ्तों में पेट्रोल-डीजल करीब ₹7 से ₹8 प्रति लीटर तक महंगे हो चुके हैं।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान से जुड़े हालात के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई बाधित होने की आशंका ने वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित किया है, जिसका असर भारत में भी दिखाई दे रहा है।

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली हलचल सीधे घरेलू ईंधन कीमतों पर असर डालती है।

आम आदमी का बिगड़ रहा बजट

लगातार बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दामों का असर अब आम लोगों के मासिक बजट पर साफ दिखाई देने लगा है। निजी वाहन चलाना महंगा हो गया है और परिवहन खर्च बढ़ने से रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। कई शहरों में लोग अब निजी वाहनों की बजाय मेट्रो, बस और सार्वजनिक परिवहन का सहारा लेने लगे हैं।

सोशल मीडिया पर भी लोगों का गुस्सा देखने को मिल रहा है। कहीं लोग “अब साइकिल ही सहारा है” जैसी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं, तो कहीं सरकार से राहत की मांग उठ रही है।

विपक्ष ने साधा निशाना

लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने इसे “फ्यूल लूट” बताते हुए कहा कि सरकार आम जनता पर आर्थिक बोझ डाल रही है।

वहीं सरकार का कहना है कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत अभी भी कई देशों की तुलना में उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश कर रहा है। तेल कंपनियों का दावा है कि बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

आगे और बढ़ सकते हैं दाम?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल और महंगे हो सकते हैं। कुछ रिपोर्ट्स में तेल कंपनियों के घाटे का हवाला देते हुए आगे और बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है।

बढ़ती महंगाई के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आम आदमी का बजट इस लगातार बढ़ते ईंधन संकट को झेल पाएगा?