धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर: शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को, CJP ने कहा- आंदोलन की बड़ी जीत
नई दिल्ली: लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन और NEET पेपर लीक विवाद के बीच केंद्र सरकार ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। सरकार ने शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार फिलहाल प्रह्लाद जोशी को सौंप दिया है। इस फैसले के बाद आंदोलन का नेतृत्व कर रहे CJP (Collective Justice Platform) ने इसे अपनी बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि उनकी प्रमुख मांगें स्वीकार कर ली गई हैं, हालांकि संगठन ने अब आगे की तीन नई मांगें भी सरकार के सामने रखी हैं।
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह आंदोलन की केवल शुरुआती सफलता है। उन्होंने कहा कि "अभी पहला विकेट गिरा है, हमारी लड़ाई शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और छात्रों को न्याय मिलने तक जारी रहेगी।" उनका कहना है कि केवल मंत्री बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरे परीक्षा तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी।
इस्तीफे के बाद CJP ने अपनी नई डिमांड लिस्ट जारी की। संगठन ने मांग की कि NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में हुई कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच पूरी की जाए, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार लागू किए जाएं। साथ ही छात्रों के हितों की रक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था बनाने की भी मांग की गई।
इस घटनाक्रम पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की बड़ी जीत है और शांतिपूर्ण आंदोलन के जरिए छात्रों की आवाज सरकार तक पहुंची है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार अब शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाएगी।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को हाल के समय में छात्रों के आंदोलन से जुड़ी सबसे बड़ी राजनीतिक घटनाओं में माना जा रहा है। पिछले कई दिनों से देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र और युवा परीक्षा प्रणाली में सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। आंदोलनकारी संगठनों का दावा है कि यह फैसला जनदबाव और लगातार चल रहे आंदोलन का परिणाम है।
अब सभी की नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर है। शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे प्रह्लाद जोशी के सामने परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करना, छात्रों की चिंताओं का समाधान करना और लंबित मांगों पर निर्णय लेना बड़ी चुनौती होगी। वहीं CJP ने संकेत दिया है कि यदि नई मांगों पर भी सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन आगे भी जारी रखा जाएगा।





