NEET पेपर लीक मामले में नया खुलासा
देशभर में चर्चा का विषय बने NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में अब एक बड़ा तकनीकी खुलासा सामने आया है। जांच एजेंसियों को ऐसे व्हाट्सएप मैसेज मिले हैं जिन पर “Forwarded Many Times” टैग दिखाई दे रहा था। इसी टैग के आधार पर अधिकारियों ने अनुमान लगाया कि कथित प्रश्नपत्र और उत्तर बड़ी संख्या में अलग-अलग ग्रुप्स में तेजी से फैलाए गए थे।
सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में इन दस्तावेजों को “गेस पेपर” और “100% कॉमन प्रश्न” बताकर छात्रों तक पहुंचाया गया, लेकिन बाद में कई प्रश्न असली परीक्षा से मेल खाते पाए गए। इसके बाद जांच एजेंसियों ने डिजिटल ट्रेल खंगालना शुरू किया।
नासिक से सीकर तक फैला नेटवर्क
प्रारंभिक जांच में महाराष्ट्र के नासिक, राजस्थान के सीकर और कुछ अन्य शिक्षा केंद्रों के बीच कनेक्शन सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि कुछ कोचिंग नेटवर्क, टेलीग्राम चैनल और व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए प्रश्नपत्र साझा किए गए।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि पेपर सबसे पहले किस डिवाइस से वायरल हुआ और किन-किन लोगों ने इसे आगे फैलाया।
सोशल मीडिया बना सबसे बड़ा माध्यम
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करके पेपर को “स्टडी मटेरियल” और “प्रेडिक्शन सेट” के नाम पर प्रसारित किया। इससे छात्रों को शुरुआत में शक नहीं हुआ।
साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि “Forwarded Many Times” जैसे फीचर अब डिजिटल जांच में अहम सबूत साबित हो सकते हैं, क्योंकि इससे मैसेज के बड़े स्तर पर प्रसार की पुष्टि होती है।
CBI और साइबर टीम की जांच तेज
केंद्र सरकार द्वारा मामले को गंभीर मानते हुए जांच एजेंसियों को तकनीकी डेटा, चैट रिकॉर्ड और डिजिटल डिवाइस खंगालने के निर्देश दिए गए हैं। कई संदिग्धों से पूछताछ जारी है और कुछ मोबाइल फोन व लैपटॉप फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी
पेपर लीक विवाद के बाद देशभर के छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। कई छात्रों का कहना है कि उन्होंने महीनों की मेहनत की, लेकिन पेपर लीक की खबरों ने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए।
सोशल media पर भी परीक्षा प्रणाली में सुधार और सख्त कानून की मांग तेज हो गई है।





