ओडिशा में मासिक धर्म के दौरान लड़कियों की शिक्षा पर गंभीर असर पड़ रहा है। अध्ययन के अनुसार, राज्य की लगभग 74 प्रतिशत छात्राएं हर मासिक धर्म चक्र के दौरान 1 से 8 दिनों तक स्कूल नहीं जा पाती हैं। इसका कारण हैं, गोपनीयता की कमी, शौचालयों की खराब स्थिति और समाज में मासिक धर्म को लेकर मौजूद कलंक इसके प्रमुख कारण हैं।
राज्य के 94 प्रतिशत स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय तो उपलब्ध हैं, लेकिन मासिक धर्म स्वच्छता से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। कई स्कूलों में पानी और साबुन जैसी आवश्यक सुविधाएं भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं, जिससे छात्राओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 56 प्रतिशत स्कूलों में सैनिटरी वेस्ट के सुरक्षित निपटान की कोई व्यवस्था नहीं है। कई स्थानों पर असुरक्षित तरीकों से कचरा निपटाया जाता है, जिससे पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ रही हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्कूलों में बेहतर स्वच्छता सुविधाएं, सुरक्षित कचरा निपटान प्रणाली और मासिक धर्म के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयास किए जाएं, तो छात्राओं की स्कूल में उपस्थिति में सुधार लाया जा सकता है।
यह अध्ययन इस बात की ओर संकेत करता है कि मासिक धर्म केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि शिक्षा और लैंगिक समानता का भी मुद्दा है। छात्राओं को बिना किसी बाधा के शिक्षा प्राप्त हो सके, इसके लिए प्रभावी कदम उठाना समय की मांग है।





