Bahuda Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ की वापसी का उत्सव, जानिए परंपरा और धार्मिक महत्व

पुरी (ओडिशा): विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा का अंतिम और महत्वपूर्ण चरण बहुड़ा यात्रा 2026 कहलाता है। यह वह पवित्र अवसर है जब भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा गुंडिचा मंदिर से वापस अपने मुख्य धाम श्री जगन्नाथ मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं। बहुड़ा शब्द का अर्थ ही "वापसी की यात्रा" होता है।

क्या है बहुड़ा यात्रा की परंपरा?

रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ अपने भाई-बहन के साथ तीन भव्य रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर पहुंचते हैं। वहां कुछ दिनों तक ठहरने के बाद उनकी वापसी यात्रा निकाली जाती है, जिसे बहुड़ा यात्रा कहा जाता है। भक्त इसे भगवान के अपने मूल निवास लौटने का शुभ अवसर मानते हैं।

तीनों रथों पर होती है भगवान की वापसी

बहुड़ा यात्रा में वही तीन रथ शामिल होते हैं, जिन पर भगवान रथ यात्रा के दौरान सवार हुए थे। भगवान जगन्नाथ का रथ नंदीघोष, भगवान बलभद्र का रथ तालध्वज और देवी सुभद्रा का रथ दर्पदलन कहलाता है। हजारों श्रद्धालु इन रथों की रस्सी खींचकर भगवान की यात्रा में शामिल होते हैं।

मौसी मां मंदिर की विशेष परंपरा

वापसी के दौरान भगवान जगन्नाथ के रथ कुछ समय के लिए मौसी मां मंदिर के पास रुकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां भगवान को विशेष प्रसाद के रूप में पोड़ा पीठा अर्पित किया जाता है। इसके बाद यात्रा आगे बढ़ती है।

धार्मिक महत्व

मान्यता है कि बहुड़ा यात्रा केवल भगवान की वापसी नहीं, बल्कि भक्तों के लिए आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर है। यह पर्व भक्ति, समानता और सामाजिक एकता का संदेश देता है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन करते हैं और आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करते हैं।

रथ यात्रा का समापन और आगे के अनुष्ठान

बहुड़ा यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ अपने मुख्य मंदिर में लौटते हैं। इसके बाद परंपरा के अनुसार भगवान का विशेष श्रृंगार और अन्य धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, जिनमें भक्त बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।

बहुड़ा यात्रा भगवान जगन्नाथ की उस परंपरा को दर्शाती है, जिसमें ईश्वर स्वयं भक्तों के बीच आते हैं और फिर अपने धाम लौटते हैं। यह उत्सव ओडिशा की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।