भारत में नदियों को सिर्फ जल स्रोत नहीं बल्कि “मां” का दर्जा दिया जाता है। बचपन से हमें सिखाया जाता है कि गंगा, यमुना, नर्मदा जैसी नदियां हमारी जीवनदायिनी हैं। लेकिन आज एक कड़वी सच्चाई यह है कि जिन नदियों को हम पूजते हैं, उन्हीं को हम सबसे ज्यादा नुकसान भी पहुंचा रहे हैं।
आज नदियों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। आंकड़ों के अनुसार, भारत के लगभग 70% जल संसाधन प्रदूषित हो चुके हैं और हर दिन करोड़ों लीटर बिना ट्रीट किया हुआ गंदा पानी नदियों में मिलाया जा रहा है। यह प्रदूषण केवल फैक्ट्रियों से नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की आदतों और धार्मिक परंपराओं से भी बढ़ रहा है।
हाल ही में मध्य प्रदेश में एक घटना सामने आई, जहां हजारों लीटर दूध नर्मदा नदी में “अभिषेक” के नाम पर बहा दिया गया। इसी तरह प्रयागराज में घी का विसर्जन किया गया। ये परंपराएं देखने में धार्मिक लग सकती हैं, लेकिन इनके गंभीर पर्यावरणीय परिणाम होते हैं। दूध और घी जैसे पदार्थ पानी में ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर देते हैं, जिससे मछलियां और अन्य जलीय जीव मरने लगते हैं।
इसके अलावा, प्लास्टिक, पूजा सामग्री, मूर्ति विसर्जन और घरेलू कचरा भी नदियों को जहरीला बना रहे हैं। यमुना नदी में दिखने वाला सफेद झाग और गंगा में बहता सीवेज इस स्थिति का स्पष्ट उदाहरण है।
दिलचस्प बात यह है कि कुछ नदियां, जैसे चंबल, आज भी अपेक्षाकृत साफ हैं। इसका कारण यह नहीं कि उन्हें ज्यादा पूजा जाता है, बल्कि यह है कि वहां मानवीय हस्तक्षेप कम है। इसी तरह मेघालय की उमंगोट नदी साफ-सफाई और स्थानीय नियमों के कारण आज भी पारदर्शी बनी हुई है।
दुनिया के अन्य देशों ने यह साबित किया है कि अगर सही प्रयास किए जाएं, तो नदियों को पुनर्जीवित किया जा सकता है। यूरोप की राइन नदी और इंग्लैंड की थेम्स नदी, जो कभी मृत घोषित हो चुकी थीं, आज फिर से जीवंत हो गई हैं।
समस्या का असली कारण जानकारी की कमी नहीं, बल्कि हमारी सोच और व्यवहार है। हम छोटे-छोटे कार्यों को महत्व नहीं देते, लेकिन जब वही काम लाखों लोग करते हैं, तो उसका प्रभाव बहुत बड़ा हो जाता है।
अब समय आ गया है कि हम अपनी परंपराओं को आधुनिक दृष्टिकोण से देखें। बायोडिग्रेडेबल सामग्री का उपयोग, प्लास्टिक से दूरी, वेस्ट ट्रीटमेंट और सख्त कानूनों का पालन ही इस समस्या का समाधान है।
अगर हमने अभी कदम नहीं उठाए, तो वह दिन दूर नहीं जब नदियां सिर्फ किताबों और कहानियों में ही रह जाएंगी।





