पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल लगातार जारी है। उनके समर्थकों के अनुसार, हड़ताल के 11वें दिन तक उनका वजन लगभग 7 किलोग्राम कम हो गया है, जिससे उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई है। डॉक्टरों की निगरानी में उनका नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है और स्वास्थ्य संबंधी संकेतकों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

वांगचुक और उनके समर्थक केंद्र सरकार से अपनी मांगों पर संवाद की अपील कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप कर बातचीत शुरू करने का अनुरोध किया है, लेकिन अब तक उनकी ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया या बैठक की घोषणा नहीं हुई है।

जंतर-मंतर पर जारी इस आंदोलन में विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन भी मिल रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और जल्द संवाद शुरू करना चाहिए। दूसरी ओर, सरकार की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए समर्थकों ने सरकार से मानवीय आधार पर शीघ्र वार्ता शुरू करने की अपील की है। आंदोलन के आगे बढ़ने के साथ ही इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक बहस भी तेज होती जा रही है।