मध्य प्रदेश में शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों की मान्यता व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। भोपाल से करीब 35 किलोमीटर दूर विदिशा रोड के ग्राम मुगलिया कोट स्थित श्रीराम कॉलेज का मामला बताता है कि सरकारी रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत में कितना बड़ा अंतर हो सकता है।
मीडिया की ग्राउंड जांच में जब टीम खसरा नंबर 148/149/2/1 पर पहुंची, जहां रिकॉर्ड के अनुसार श्रीराम कॉलेज संचालित होना चाहिए था, तो वहां न कॉलेज भवन मिला, न कक्षाएं, न पुस्तकालय और न ही छात्र। जिस जगह भविष्य के शिक्षकों को तैयार किया जाना था, वहां खाली मैदान और खेती नजर आई। स्थानीय लोगों ने भी बताया कि उन्होंने वर्षों से इस नाम का कोई कॉलेज संचालित होते नहीं देखा।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार करीब एक दशक से इस पते से हर वर्ष 150 विद्यार्थी उत्तीर्ण हो रहे थे। इनमें 100 छात्र B.Ed. और 50 छात्र B.Sc.-B.Ed. पाठ्यक्रम के बताए गए हैं। यानी कागजों में न केवल प्रवेश हुए, बल्कि परीक्षाएं हुईं, परिणाम घोषित हुए और डिग्रियां भी जारी होती रहीं।
मामला सामने आने के बाद 24 जून 2026 को हुई विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद (Executive Council) की बैठक में इस कॉलेज को संबद्धता (Affiliation) नहीं देने का निर्णय दर्ज किया गया। साथ ही यह भी तय किया गया कि एक सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश इस बात की जांच करेंगे कि जब कॉलेज अपने घोषित पते पर मौजूद ही नहीं था, तब छात्रों को प्रवेश कैसे मिला, परीक्षा में बैठने की अनुमति किसने दी, परिणाम किस आधार पर जारी हुए और डिग्रियां कैसे प्रदान की गईं।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इसी क्षेत्र में बागलामुखी कॉलेज और मिलेनियम कॉलेज के रिकॉर्ड भी दर्ज हैं। इससे यह सवाल और गहरा हो गया कि क्या केवल एक कॉलेज की जांच पर्याप्त है या पूरे तंत्र की समीक्षा की आवश्यकता है।
उच्च शिक्षा विभाग का कहना है कि सभी संबंधित संस्थानों से शपथपत्र (Affidavit) लिए गए हैं और यदि जांच में नियमों का उल्लंघन साबित होता है तो संबद्धता रद्द करने से लेकर कानूनी कार्रवाई तक की जाएगी।
इस पूरे प्रकरण ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—यदि कॉलेज जमीनी स्तर पर मौजूद नहीं था, तो वर्षों तक निरीक्षण किसने किया? प्रवेश की अनुमति किसने दी? परीक्षा फॉर्म किसने स्वीकार किए? और सबसे अहम, उन छात्रों की डिग्रियों की जवाबदेही कौन तय करेगा, जिन्होंने इन संस्थानों से पढ़ाई करने का दावा किया? इन सवालों के जवाब अब जांच रिपोर्ट से मिलने की उम्मीद है।





