भारत में इंटरनेट उपयोग को लेकर लैंगिक असमानता अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। देश में इंटरनेट उपयोग के मामले में पुरुषों और महिलाओं के बीच 16.2 प्रतिशत अंकों का अंतर दर्ज किया गया है। जहां 80.5% पुरुष इंटरनेट का उपयोग करते हैं, वहीं केवल 64.3% महिलाएं ही इंटरनेट तक पहुंच बना पा रही हैं।

यह अंतर सबसे अधिक ग्रामीण भारत में देखने को मिलता है, जहां पुरुषों और महिलाओं के बीच इंटरनेट उपयोग में 18.5 प्रतिशत अंकों का अंतर है। इससे स्पष्ट होता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की डिजिटल पहुंच अभी भी सीमित है और उन्हें तकनीक से जोड़ने के लिए अधिक प्रयासों की आवश्यकता है।

हालांकि, एक सकारात्मक पहलू यह भी सामने आया है कि शहरी महिलाओं में इंटरनेट उपयोग की दर 77.3% है, जो ग्रामीण पुरुषों (77.1%) से थोड़ी अधिक है। यह दर्शाता है कि शहरी क्षेत्रों में डिजिटल सुविधाओं और जागरूकता के कारण महिलाओं की इंटरनेट तक पहुंच में सुधार हुआ है।

शिक्षा, डिजिटल साक्षरता, स्मार्टफोन की उपलब्धता और इंटरनेट सेवाओं तक आसान पहुंच बढ़ाकर इस लैंगिक अंतर को कम किया जा सकता है। सरकार और निजी क्षेत्र द्वारा चलाई जा रही डिजिटल समावेशन योजनाओं से आने वाले वर्षों में इस अंतर को और घटाने की उम्मीद जताई जा रही है।

डिजिटल युग में इंटरनेट केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी योजनाओं तक पहुंच का महत्वपूर्ण साधन बन चुका है। ऐसे में महिलाओं की समान डिजिटल भागीदारी सुनिश्चित करना समावेशी विकास के लिए अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है।