मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ आदिवासी परिवारों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। विस्थापन और पर्याप्त मुआवजा न मिलने की आशंका को लेकर ग्रामीणों ने प्रदर्शन शुरू किया है, जिसे "चिता आंदोलन" नाम दिया गया है।
इस आंदोलन के तहत प्रदर्शनकारी प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार की चिताओं पर लेटकर अपना विरोध जता रहे हैं। उनका कहना है कि वे अपनी पुश्तैनी जमीन और जंगल छोड़ने के बजाय मरना स्वीकार करेंगे, लेकिन बिना न्यायपूर्ण मुआवजे और उचित पुनर्वास के विस्थापन नहीं मानेंगे।
ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजना से प्रभावित कई परिवारों को अब तक स्पष्ट पुनर्वास योजना और पर्याप्त मुआवजे का भरोसा नहीं मिला है। उनका कहना है कि उनकी आजीविका खेती, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है, जिन्हें छोड़ने के बाद उनके सामने जीवनयापन का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
वहीं, प्रभावित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा और पुनर्वास उपलब्ध कराया जाएगा। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कही है।
केन-बेतवा लिंक परियोजना को बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराने की एक महत्वपूर्ण योजना माना जाता है। हालांकि, परियोजना के कारण प्रभावित होने वाले ग्रामीणों और आदिवासी समुदाय की चिंताओं ने विकास और विस्थापन के बीच संतुलन पर एक बार फिर बहस को तेज कर दिया
है।





