केंद्र सरकार ने ईंधन निर्यात शुल्क (विंडफॉल टैक्स) में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए डीज़ल और विमान ईंधन (ATF) के निर्यात पर टैक्स बढ़ा दिया है, जबकि पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क में कमी की है। यह फैसला वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू ईंधन बाजार की स्थिति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
सरकार समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव के आधार पर विंडफॉल टैक्स की समीक्षा करती है। जब कंपनियों को निर्यात से अधिक लाभ मिलता है, तब अतिरिक्त कमाई का एक हिस्सा टैक्स के रूप में वसूला जाता है।
डीज़ल और ATF पर शुल्क बढ़ने से इनके निर्यात पर कुछ असर पड़ सकता है, जबकि पेट्रोल पर शुल्क कम होने से निर्यात को बढ़ावा मिलने की संभावना है। सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना और राजस्व संतुलन बनाए रखना है।





