सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल 18 वें दिन भी जारी है। लंबे समय से भूख हड़ताल के कारण उनके स्वास्थ्य में लगातार कमजोरी आ रही हैं , मांसपेशियों में कमजोरी, शरीर में दर्द और इस अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के कारण उनका वजन लगभग 8.5 किलोग्राम कम हो गया है।

लंबे समय तक उपवास करने से शरीर में पोषक तत्वों की कमी, मांसपेशियों का क्षय, कमजोरी और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार चिकित्सकीय निगरानी रखी जा रही है।

सोनम वांगचुक का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर सरकार के साथ सार्थक संवाद करना चाहते हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक सरकार बातचीत शुरू नहीं करती, तब तक वे अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे।

यह भूख हड़ताल शांतिपूर्ण विरोध का एक माध्यम है, जिसके जरिए वे अपनी मांगों की ओर सरकार और देश का ध्यान आकर्षित क करना चाहते हैं।

इस बीच, उनके समर्थक सरकार से जल्द संवाद शुरू करने और मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील कर रहे हैं।सभी की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और बातचीत कब शुरू होती है।हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें उनकी जान बचाने के लिए उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराने और जरूरत पड़ने पर जबरन खाना खिलाने (force-feeding) की मांग की गई है। कोर्ट ने दोनों सरकारों से सख्त रुख अपनाते हुए जल्द से जल्द जवाब देने को कहा है।