लाल दुनिया कैसे लगेगी आपको।
अब आप सोचोगे लाल दुनिया क्या हैं।
मैं एक आदमी से से पूछा। "दुनिया कैसे रंग की है"। उन्होंने बड़े उल्लास और उत्तेजित होकर कहा दुनिया। बहुत खूबसूरत है रंग बिरंगी हरी भरी, उन के चेहरे पर एक अलग ही चाह हैं दुनिया के लिए।
वही सवाल मैंने एक औरत से पूछा " दुनिया कैसे रंग की है" उन्होंने - पहले तो सोचा फिर बड़े धीरे स्वर में बोलती है पता नही, क्योंकि मैं जहां जाती हूं वहां पर घुंघट में ही होती हैं।
फिर उदास मन से कहा, "मेरे लिए दुनिया मेरे दुपट्टे के रंग जैसी ही हैं " यह कहते हुऐ, आवाज डूबने लगी निगाहों की जर्द पंखुड़ियों पर हल्की पानी सी लहर सी दौड़ गयी हो जैसे।
क्योंकि उसे उस दुपट्टे के आनंद से ही दुनिया या लोगों को देखना होता हैं। वो चाह कर भी घुंघट नहीं उठा सकती, क्योंकि हमने यह धारणा या विचारधारा बना ली हैं।
की औरतों को घुंघट के अंदर ही रहना है उसे कोई देख ना ले, क्योंकि वो हमारी इज्जत है अगर कुछ देखना चाहे फिर भी नहीं देख नहीं सकती, क्योंकि वह घुंघट में है। और घुंघट हटा लिया तो हमारी नाक कट जाएगी ।
क्या उसे हक नहीं हैं दुनिया देखने का या खुल के जीने का अगर हम एक औरत को बहू की जगह अपनी बहन, बेटी, मां समझ के जीने दे। हम उस कि पसंद के हिसाब से जीने दे ना की उस पर अपने संस्कृति के नाम पर थोप दे, संस्कृति का मतलब ये नहीं कि हम किसी पर कुछ थोप दे, और एक औरत को पता होता हैं कि सम्मान और अपने पहनावे के बारे में और असली सम्मान घुंघट के आनंद नहीं होती। सम्मान घुंघट बिना के भी हो सकता है अगर करना चाहे। और वो उस कि मर्जी होनी चाहिए वो कैसे रहना चाहती हैं,
उसे भी हक है रंग बिरंगी दुनिया देखने का । अगर आप एक औरत की आंखों से दुनिया देखोगे तो और भी खूबसूरत दिखेगी।





