भारतीय रंगमंच और समानांतर सिनेमा की दिग्गज हस्ती विजया मेहता का 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से कला और रंगमंच जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। लंबे समय तक मराठी रंगमंच को नई दिशा देने वाली विजया मेहता को भारतीय थिएटर की सबसे प्रभावशाली निर्देशकों में गिना जाता था।

विजया मेहता ने 1960 के दशक में प्रसिद्ध थिएटर समूह रंगायन की सह-स्थापना की, जिसने मराठी प्रायोगिक रंगमंच को नई पहचान दिलाई। उन्होंने कई यादगार नाटकों का निर्देशन किया और भारतीय समानांतर सिनेमा में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी निर्देशित फिल्में 'राव साहेब' और 'पेस्टनजी' आज भी भारतीय सिनेमा की महत्वपूर्ण कृतियों में गिनी जाती हैं।

विजया मेहता केवल एक उत्कृष्ट निर्देशक ही नहीं, बल्कि कई कलाकारों की प्रेरणास्रोत और मार्गदर्शक भी थीं। अभिनेता अनुपम खेर सहित अनेक कलाकारों ने उन्हें अपना गुरु माना और उनके निधन पर भावुक श्रद्धांजलि अर्पित की।

उनके निधन के साथ भारतीय रंगमंच के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत हो गया है। कला जगत हमेशा उनके योगदान, अनुशासन और सृजनात्मक दृष्टि को याद रखेगा। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के कलाकारों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।